इरेक्टाइल डिस्फंक्शन, नपुंसकता का कारण क्या है ?

By Dr. Rekha Trivedi - January 26, 2019

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन एक ऐसी बीमारी है जिसमें लिंग में ठीक से तनाव ना आ आने की वजह से पुरुष सेक्स नहीं कर पाता है. इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (नपुंसकता) का कारण समझने से पहले यह समझना जरूरी है कि लिंग में तनाव आता कैसे है ? जब भी पुरुष सेक्सुअल उत्तेजना को महसूस करता है तो लिंग में खून का बहाव बढ़ जाता है, यह खून कुछ समय तक लिंग में ही रुक जाता है जिसकी वजह से लिंग में तनाव आता है. इस पूरी प्रक्रिया को होने के लिए 3 चीजों की आवश्यकता है –

1. सेक्स के लिए उत्तेजना
2. खून की नली (रक्त धमनी) में खून का ठीक प्रवाह
3. स्वस्थ लिंग की नसें

इन शारीरिक कारणों के अलावा एक शांत मन भी सेक्स के लिए उतना ही आवश्यक है . यदि सेक्स से पहले पुरुष के मन में इस बात की घबराहट हो जाती है कि वह सेक्स ठीक से कर पाएगा या नहीं तो उस घबराहट की वजह से अक्सर लिंग में शिथिलता आ जाती है, और सेक्स नहीं हो पाता. निम्नलिखित, इरेक्टाइल डिस्फंक्शन के आम कारण हैं-

1. शारीरिक बीमारियां जैसे उच्च रक्तचाप एवं शुगर . शुगर की बीमारी इरेक्टाइल डिस्फंक्शन के कारणों में से एक प्रमुख कारण है
2. जीवन शैली की समस्याएं जैसे कि सिगरेट, शराब या फिर दूसरे नशीले पदार्थों का सेवन
3. डिप्रेशन एवं एंजाइटी डिसऑर्डर जैसी मानसिक समस्याएं.
4. पति पत्नी के बीच खराब रिश्ते और अक्सर होने वाली लड़ाई भी सेक्स समस्याओं का एक कारण है
5. पुरुषों में अपने शरीर को लेकर हीन भावना और यह डर कि उनकी पार्टनर उनके शरीर को पसंद नहीं करेगी
6. कुछ प्रकार की दवाइयों का सेवन जैसे कि कुछ ब्लड प्रेशर की और डिप्रेशन की दवाइयां
7. अन्य कारण: पहली बार सेक्स संबंध बनाना, शराब या किसी और नशीले पदार्थ को इस्तेमाल करने के बाद सेक्स भी इरेक्टाइल डिस्फंक्शन का कारण हो सकते हैं. अधिकतर पुरुषों में पहली बार सेक्स के समय उत्तेजना के साथ साथ इस बात की घबराहट भी रहती है कि क्या वह ठीक से सेक्स कर पाएंगे या नहीं. यदि घबराहट, उत्तेजना से ज्यादा हो जाती है तो लिंग में तनाव नहीं आ पाता. शराब या किसी और नशीले पदार्थ को इस्तेमाल करने के बाद सेक्स करने के प्रयास में भी कई बार लिंग में तनाव नहीं आता.

संक्षेप में ,इरेक्टाइल डिस्फंक्शन के कारण शारीरिक (लिंग में खून की कम सप्लाई, लिंग की नसों की कमजोरी इत्यादि)
या फिर मानसिक (डिप्रेशन, घबराहट इत्यादि) हो सकते हैं. इसीलिए आवश्यक है कि जांच ठीक से करके सही कारण का पता लगाया जाए और उसी के अनुसार इलाज किया जाए